मुक्तक

              *मुक्तक*

तुम्हारे रुप की किरणें, उजाला दिल में भरती हैं।
करें जब प्यार की रुनझुन निवाला दिल को करती हैं।
गिरफ्तारी करे जब तू बचाना तब बडा़ मुश्किल-
मिलें जब आँख से आँखे दिवाला दिल का करती हैं।।

कौशल कुमार पाण्डेय "आस" बीसलपुरी।

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