Posts

Showing posts from April, 2018

मुक्तक

              मुक्तक दिलों की पीर मिट जाये अगर पनघट पे आ जाओ। दिदे शमशीर मिल जाये अगर पनघट पे आ जाओ। तुम्हारी 'आस' में सारा ही दिन मैं राह तकता हूँ -  तेरी तस्वीर मिल जाये अगर पनघट पे आ जाओ।।   आशुकवि कौशल कुमार पाण्डेय " आस " बीसलपुर ( पीलीभीत ) उत्तर प्रदेश : भारत।                      मुक्तक                     ****** कसक बन कर तेरी यादें समायी अब भी सीने में। तुम्हारा साथ मिलता तो मजा आ जाता  जीने  में। चले आओ तुम्हारी राह में पलकें बिछी अब तक- तुम्हारे हाथ से पीता मजा आ जाता  पीने में।। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ कौशल कुमार पाण्डेय "आस बीसलपुरी" ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~