मुक्तक

             मुक्तक

दिलों की पीर मिट जाये अगर पनघट पे आ जाओ।
दिदे शमशीर मिल जाये अगर पनघट पे आ जाओ।
तुम्हारी 'आस' में सारा ही दिन मैं राह तकता हूँ - 
तेरी तस्वीर मिल जाये अगर पनघट पे आ जाओ।।

 आशुकवि कौशल कुमार पाण्डेय " आस "
बीसलपुर ( पीलीभीत ) उत्तर प्रदेश : भारत।


                     मुक्तक
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कसक बन कर तेरी यादें समायी अब भी सीने में।
तुम्हारा साथ मिलता तो मजा आ जाता  जीने  में।
चले आओ तुम्हारी राह में पलकें बिछी अब तक-
तुम्हारे हाथ से पीता मजा आ जाता  पीने में।।
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कौशल कुमार पाण्डेय "आस बीसलपुरी"
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