मुक्तक दिलों की पीर मिट जाये अगर पनघट पे आ जाओ। दिदे शमशीर मिल जाये अगर पनघट पे आ जाओ। तुम्हारी 'आस' में सारा ही दिन मैं राह तकता हूँ - तेरी तस्वीर मिल जाये अगर पनघट पे आ जाओ।। आशुकवि कौशल कुमार पाण्डेय " आस " बीसलपुर ( पीलीभीत ) उत्तर प्रदेश : भारत। मुक्तक ****** कसक बन कर तेरी यादें समायी अब भी सीने में। तुम्हारा साथ मिलता तो मजा आ जाता जीने में। चले आओ तुम्हारी राह में पलकें बिछी अब तक- तुम्हारे हाथ से पीता मजा आ जाता पीने में।। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ कौशल कुमार पाण्डेय "आस बीसलपुरी" ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~